मिट्टी से बना शरीर, एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सत्य या मिथ्या?

“मिट्टी से बना शरीर, एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा।” (अंग्रेजी: "The body made of soil will one day merge into the soil.)

इस कहावत का अर्थ है “मानव शरीर मिट्टी से बना है और अंततः मृत्यु के बाद फिर से मिट्टी में मिल जाएगा।” यह वाक्य जीवन की नश्वरता (क्षणभंगुरता) और मृत्यु की अनिवार्यता को दर्शाता है। इसका संदेश यह है कि मानव को अहंकार और भौतिक संपत्तियों के मोह में नहीं फँसना चाहिए, क्योंकि अंत में सब कुछ मिट्टी में ही मिल जाना है।

इस कहावत को हम बड़े-बुजुर्ग से बचपन से सुनते आ रहे हैं, क्योंकि यह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में काफी प्रचलित है। इसे अपनी स्थानीय भाषा और बोली में कहते हैं। हमारे गांव में इसे भोजपुरी में इस प्रकार कहा जाता है— “माटी से बनल शरीर, एगो दिन माटी में मिल जाई।” भले ही आपके गांव या कस्बे में इसे आपकी अपनी भाषा और बोली में अलग-अलग तरीकों से कहा जाता होगा, लेकिन सबका भाव और अर्थ एक ही है। इस लेख में हम इस कहावत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करेंगे।

जोहार साथियों, मेरा नाम सतीश कुमार शर्मा है, मैं जीव विज्ञान का छात्र हूँ और आप अभी देवदतवा.कॉम पर पढ़ रहे है। 

मिट्टी से बना शरीर, एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सत्य या मिथ्या?

mitti ka sharir mitti mein mil jayega
Mitti ka sharir mitti mein mil jayega


मानव शरीर के निर्माण में तत्वों की भूमिका

वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो हमारा मानव शरीर (Human Body) विभिन्न रासायनिक तत्वों से मिलकर बना है। सी.एन.आर. राव द्वारा लिखित "Understanding Chemistry" (यूनिवर्सिटीज प्रेस, हैदराबाद) के अनुसार, मानव शरीर निम्नलिखित प्रमुख तत्वों से बना होता है:

  • ऑक्सीजन (O)
  • सिलिकॉन (Si)
  • कैल्शियम (Ca)
  • सोडियम (Na)
  • मैग्नीशियम (Mg)
  • हाइड्रोजन (H)
  • कार्बन (C)
  • सल्फर (S)
  • नाइट्रोजन (N)

ये तत्व न केवल हमारे शरीर में पाए जाते हैं, बल्कि पृथ्वी की मिट्टी में भी इन्हीं तत्वों की मौजूदगी होती है।

मृत्यु के बाद शरीर का प्राकृतिक विघटन

जब कोई जीव मरता है, तो उसका शरीर अलग-अलग तरीकों से नष्ट होता है, जैसे:

  • दफनाने (Burial) – शरीर धीरे-धीरे सड़कर मिट्टी में मिल जाता है।
  • दाह संस्कार (Cremation) – शरीर जलकर गैसों और राख में बदल जाता है, जो फिर से मिट्टी में मिल सकती है।
  • प्राकृतिक विघटन (Natural Decomposition) – यदि शव को प्रकृति के हवाले छोड़ दिया जाए, तो बैक्टीरिया और अन्य जीव इसे धीरे-धीरे मिट्टी में मिला देते हैं।

इन सभी प्रक्रियाओं में शरीर में मौजूद तत्व अंततः पृथ्वी में वापस चले जाते हैं।

मिट्टी और शरीर के बीच वैज्ञानिक समानता

पृथ्वी की ऊपरी सतह, जिसे हम मिट्टी (Earth’s Crust) कहते हैं, भी उन्हीं तत्वों से बनी होती है जो हमारे शरीर में मौजूद हैं।

मिट्टी और मानव शरीर में पाए जाने वाले प्रमुख तत्वों की प्रतिशत में तुलना:

तत्व मानव शरीर में मिट्टी में
हाइड्रोजन 0.14 0.5
ऑक्सीजन 46.6 18.5
कार्बन 0.03 65.0
नाइट्रोजन बहुत थोड़ा 3.3
सल्फर 0.03 0.3
सोडियम 2.8 0.2
कैल्शियम 3.6 1.5
मैग्नीशियम 2.1 0.1
सिलिकॉन 27.7 नगण्य

इस तुलना से स्पष्ट होता है कि मानव शरीर और मिट्टी के बीच तत्वों की संरचना में समानता है। केवल प्रतिशत में अंतर होता है, लेकिन मूल तत्व समान ही रहते हैं।

निष्कर्ष: सत्य या मिथ्या

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह सिद्ध होता है कि मानव शरीर मुख्यतः उन्हीं तत्वों से बना है, जो मिट्टी में पाए जाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर विभिन्न जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पुनः मिट्टी में मिल जाता है। इसलिए, यह कहावत "मिट्टी से बना शरीर, एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा" पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से भी सत्य प्रतीत होती है।

इसका अर्थ यह है कि जीवन अस्थायी है, और हमें इसे विनम्रता और सादगी से जीना चाहिए। अंततः, हर जीव का अस्तित्व प्रकृति में विलीन हो जाता है, और यही सृष्टि का नियम है।

— लेखक: सतीश कुमार शर्मा

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